भारत मे अर्थव्यवस्ता Indian Economy in hindi
भारत मे अर्थव्यवस्ता की शुरुवात
अंग्रेजो के
भारत
आने
से
पहले
यहाँ
की
अर्थव्यवस्ता
अन्य
देशों
के
अर्थव्यवस्ता
के
समान
थी ।
गाँव आत्मनिर्भर
थे
।
सिर्फ
लोहा
और
नमक
लेने
के
लिए
गाँव
के
लोग
शहर
जाया
करते
थे।
शहर से
सिर्फ
प्रशासन
का
काम
चलता
था
।
शहर प्रशासनिक
,धार्मिक और
वाणिज्यक
केंद्र
हुआ
करते
थे
।
भारत के
वस्त्र
विदेशों
मे
बेचे
जाते
थे
और
यहाँ
के
वस्त्र
विस्वविख्यात
थे
क्यूंकि
भारत
मे
रेशमी
,सूती और
मलमली
कपड़े
उत्पाद
किए
जाते
थे
।
संगमरमर का
काम
बड़े
स्तर
पर
होता
था
।
पत्थर तरासने
का
काम
भी
बड़े
स्तर
पर
होता
था
।
भारत से
बड़े
स्तर
मे
सोना
,चांदी ,मसाले
,नील
,अफीम ,कपास
आदि
का
निर्यात
विदेशों
मे
होता
था
।
अंग्रेजो के आने के बाद भारत की अर्थव्यवस्ता
अंग्रेज मूल
रूप
से
भारत
दौलत
लेने
के
उद्देस्य
से
ही
आए
थे
।
18 वी शदी
मे
इंग्लैंड
मे
अद्योगिक
क्रांति
(industrial Revolution) हुई और
इसके
लिए
इंग्लैंड
को
कच्चे
माल
की
और
एक
बाजार
की
जरूरत
थी
जहां
वे
अपना
समान
बेच
सकें
।
तब
उन्हे
भारत
के
रूप
मे
एक
ऐसा
देश
मिल
गया
जहां
से
उन्हे
कच्चे
माल
भी
मिल
जाता
और
उनका
समान
भी
अच्छे
किमत
मे
भारत
मे
बिक
जाता
।
जब अंग्रेज
भारत
आए
तो
सबसे
पहले
उन्होंने
खाद्य
फसल
की
जगह
नगदी
फसल
उगाने
के
लिए
किसानों
को
बाध्य
कर
दिया
जिसके
कारण
भारत
मे
बड़े
स्तर
मे
अकाल
पड़ने
लगे
।
अंग्रेजो द्वारा
ब्रिटिश
पूंजी
को
अनेक
तरह
से
भारत
के
विभिन्न
जगहों
मे
निवेस
किया
गया
।
भारत
की
आधारभूत
संगरचनाएं
बनाए
गए
जैसे
की
रैलवे
,बंदरगाह ,विद्युत
,सोना खनन
,बीमा ,बैंकिंग
इत्यादि
।
चाय के
बागान
लगाए
गए
।
रबर की
खेती
की
गई
।
अंग्रेज भरात
मे
बनी
की
भी
सामान
नहीं
खरीदते
थे
। सब इंग्लैंड
से
ही
खरीदते
थे
।
इससे
भारत
का
सारा
पैसा
इंग्लैंड
जाने
लगा
।
वस्तुओ का
आयात
अधिक
होने
लगा
और
निर्यात
कम
होने
लगा
जिससे
व्यापार
संतुलन
बिगड़
गया
।
विदेसी मुद्रा
दरों
(Exchange rate) मे हेर-फेर
कर
दिया
गया
जिसके
कारण
रुपया
का
भाव
बढ़
गया
और
पौंड
का
भाव
कम
हो
गया
जिससे
यहाँ
का
समान
वह
जा
कर
सस्ता
हो
गया
।
ब्रिटेन ने
भारत
को
अपने
ऊपर
खर्च
करने
के
लिए
बाध्य
कार
दिया
।
अगर ब्रिटेन
कोई
भी
ऋण
लेता
था
तो
उस
ऋण
का
ब्याज
भारत
सरकार
देती थी ।
अंग्रेजो के
सारे
पेंशन
भारत
से
जाता
था
सामान के
खरीद
पर
जो
व्यय
होती
थी
उसे
अंग्रेज
ले
जाते
थे
।
पूर्वी इंडिया
कॉम्पनी
(East India Company) के द्वारा
जीतने
भी
युद्ध
लड़े
गए
उन
सब
का
भुगतान
भारत
से
होता
था
सेना के
सारे
खर्चे
भारत
से
होते
थे
।
भारत और
इंग्लैंड
के
बीच
टेलीग्राम
लाइन
() खिची गई
उसका
खर्चा
भी
भारत
सरकार
से
लिया
गया
।
प्रथम तथा
दूसरा
विश्व
युद्ध
का
सारा
खर्चा
भी
भारत
से
ही
किया
गया
जबकी
भारत
इस
युद्ध
मे
शामिल
भी
नहीं
था
।


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