राजकोषीय नीति, प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector), भूमि सुधार कार्यक्रम

 भारत मे अर्थव्यवस्ता Indian Economy in hindi

भारतीय अर्थव्यवस्ता  अंग्रेजो के समय ओर अंग्रेजो के बाद 

विश्व की आर्थिक प्रणाली 

राष्ट्रीय आय क्या होती है ?

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राजकोषीय नीति


राजकोषीय नीति सरकार के आय ,व्यय और ऋण प्रबंधन का लेख जोखा होता है ।

राजकोषीय नीति मे बजट मे आय व्यय का हिसाब होता है ।

अगर सरकार के बजट मे आय से अधिक व्यय हो जाए तो सरकार विभिन्न तरीके से इस घाटे को पूरा करती है –

1.    राजस्व नीति - कर (Tex) बढ़ा देगी ।

2.    व्यय नीति – समाज की सुरक्षा तथा लोगों की जीवन गुणवार्ता को सुधारने के लिए राज्य द्वारा सार्वजनिक व्यय किया जाता है जिसके अंतर्गत सुरक्षा ,सामाजिक सेवाएं ,विकाशसात्मक व्यय आता है , इन सब को सरकार कम कर देगी जिससे अर्थव्यवस्था मे ज्यादा पैसे नहीं पहुचेगा और महंगाई कम हो जाएगी ।


प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector)


भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है ।

देश के जनसंख्या का 60% हिस्सा कृषि तथा उसके संबंधित क्षेत्रो मे काम करती है ।

एलेन सेवरी के अनुसार – “कृषि केवल फसल का उत्पादन ही नहीं करता , वरन ये विस्व की भूमि और जल का उपयोग कर रोटी और कपड़े का उत्पादन करता है । कृषि के बिना बैंक ,विश्वविद्यालय ,चर्च ,सेना आदि का कोई अस्तित्व नहीं है । ”

भारत कई तरह की फसलें जैसे चाय ,मसालें ,तंबाकू ,चावल ,रबर आदि का बड़ी मात्र मे विदेशों मे निर्यात कर बड़ी मात्रा मे विदेशी धन भारत लाता है ।

कृषि जनित व्यापार से परिवहन का व्यापार भी बढ़ता है ।

कृषि , भारतीय उद्योग के लिए कच्चे माल की आपूर्ति को भी पूरा करता है ।

कृषि से रोजगार भी मिलता है और खाद्य सुरक्षा भी मिलता है ।

 

भूमि सुधार कार्यक्रम क्यूं लाया गया ?

भूमि सुधार कार्यक्रम का मकसद भूमि पर खेती करने वालों का शोषण खतम करना था

मध्यस्तो का उन्मूलन होना चाहिए । वास्तविक किसान सरकार से सीधे संपर्क कर सके ।

 

सरकार से इसके लिए क्या किया ?

सरकार से मध्यस्तो को खतम किया ।

जोतो की चकबंदी कर दी । अर्थात बहुत सारे खेत इधर-उधर बिखरे थे उन सबको मिलाकर एक कर दिया ।

जोतो की सीमा बंदी कर दी ।

किसानों के लिए बहुत सारे सुरक्षा लाए ।

सहकारी खेती प्रणाली लिए , जिसके अंतर्गत छोटे-छोटे जोत वाले किसान मिल कर कहती करें ।

भूमि Record को व्यवस्थित रखा गया और उनको नविन बनाया गया ।

 

यह कार्यक्रम नहीं चलने का कारण क्या था ?

राजनैतिक निष्ठा का अभाव ।

विभिन्न राज्यों मे पाई जाने वाली नियमों मे विभिधाता और जटिलता ।

प्रसासनिक तंत्र की उदासीनता और कानूनी परेसानियाँ ।

 

कृषि आगत प्रबंधन किसे कहते हैं ?

कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए किया जाने वाले प्रबंधन को कृषि आगत प्रबंधन कहते हैं ।

कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सिचाई ,बीज ,उर्वरक , मशीन आदि की जरूरत पड़ती है ।

यह सब करने के लिए सबसे पहले –

किसानों को शिक्षित और जागरूक करना पड़ेगा ।

बीज की स्थिति मे सुधार करना पड़ेगा ।

सिचाई सुविधा उपलब्ध करानी पड़ेगी । आज के समय मे मात्र 35% हिस्से मे ही सिचाई की सुविधा मौजूद है ,बाकी जगहें मॉनसून पर निर्भर हैं ।

किसानों को कृषि मशीनीकरण देना होगा जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी ।

किसानों को कहती का बीमा करना चाहिए ताकि कभी अगर किसी कारण से फसल नष्ट हो जाए तो किसानों को ज्यादा परेसानी ना हो ।

सरकार ने इंटरनेट (Internet) के माध्यम से सभी मंडियों को जोड़ दिया है जिसके कारण किसानों को उनका उचित मूल्य मिलेगा ।

 

भूमि सुधार कार्यक्रम के तहत बहुत सारी क्रांतियाँ भी हुई जिसे बारे मे मै अगले post मे लिखूँगा  


 

 

 

 

 

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